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हर्षद मेहता से जुड़े दमयंती ग्रुप पर SEBI कोर्ट का बड़ा फैसला

Maharashtra महाराष्ट्र: स्पेशल सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिनेश दोशी, अनिल दोशी और उनकी छह फर्मों को दोषी करार दिया है। यह सभी संस्थाएं हर्षद मेहता से जुड़े दमयंती ग्रुप का हिस्सा बताई जाती हैं। अदालत का यह फैसला वर्ष 1998 में BPL लिमिटेड और वीडियोकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों में कथित हेरफेर से जुड़े मामलों की जांच के दौरान जानकारी न देने के आधार पर सुनाया गया है।
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों ने जांच के दौरान आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, जो नियमों का उल्लंघन है। इसी आधार पर अदालत ने सभी पांच मामलों में प्रत्येक पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। इस तरह कुल मिलाकर जुर्माने की राशि कई मामलों में लागू होगी।
SEBI ने इस मामले में कुल छह कंपनियों के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की थी। इनमें इक्षु फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड, KRN फिनवेस्ट एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड, एस्क्वायर इंटरनेशनल लिमिटेड, CDP फिनकैप एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड, स्टारशेयर इन्वेस्टमेंट्स एंड फिनेंज़ प्राइवेट लिमिटेड और मनी टेलीविज़न एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड शामिल हैं।
इन सभी कंपनियों में दिनेश दोशी और अनिल दोशी के अलावा विनोद शाह और दिलीप शाह भी डायरेक्टर के रूप में जुड़े हुए थे। हालांकि, जानकारी के अनुसार विनोद शाह और दिलीप शाह का निधन हो चुका है, जिसके चलते उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया है।
यह पूरा नेटवर्क बाजार में दमयंती ग्रुप के नाम से जाना जाता था, जिस पर पहले भी वित्तीय अनियमितताओं और शेयर बाजार से जुड़े मामलों में जांच होती रही है। SEBI की ओर से यह कार्रवाई बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से की गई है।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना सभी संस्थाओं की जिम्मेदारी है और जानकारी छिपाना या न देना गंभीर उल्लंघन माना जाता है। इस मामले में दोषी पाए गए सभी पक्षों को निर्धारित जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया है।
इस फैसले को शेयर बाजार से जुड़े पुराने घोटालों और अनियमितताओं पर एक अहम कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसलों से बाजार में नियमों के पालन और जवाबदेही को मजबूत किया जा सकता है।





